मधुमेह-शुगर (डायबिटीज) कारण, लक्षण, निदान और उपचार – Diabetes in Hindi

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Written By Malik Hasnain

Malik Hasanain is a Certified Medical Practitioner with a solid background in the medical industry.

डायबिटीज के लक्षण इन हिंदी •डायबिटीज के कारण •डायबिटीज के लक्षण और निदान •शुगर बढ़ने के लक्षण क्या है? •डायबिटीज किस उम्र में होता है •महिलाओं में शुगर के लक्षण

Highlights: Diabetes या शुगर की बीमारी क्या है? इसके कारण, लक्षण व इलाज कैसे करें

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डायबिटीज या शुगर की बीमारी क्या है?

पेंक्रियाज नामक ग्रंथि से निकलने वाले हार्मोन इंसुलिन के कम निकलने अथवा बिल्कुल न निकलने से अथवा कोशिकाओं द्वारा इंसुलिन का उपयोग करने में असमर्थता या प्रतिरोध के कारण मधुमेह रोग होता है । इससे कार्बोहाइड्रेट्स , वसा व प्रोटीन की उपापचय की प्रक्रिया अस्त – व्यस्त हो जाती है । इस रोग के होने में बहुत से आनुवांशिक कारकों का हाथ होता है । इससे रोगी के रक्त और मूत्र में सामान्य से अधिक शुगर रहती है । इसके साथ ही वसा भी ज्यादा हो सकती है , जिसके परिणामस्वरूप रोगी को किटोएसिडोसिस हो सकती है। रोगी की धमनियों और केपिलरीज केशिका में वसा ज्यादा हो जाती है।

Diabetes या शुगर की बीमारी क्या है? इसके कारण, लक्षण व इलाज कैसे करें

मधुमेह या शुगर की बीमारी क्या है?  अब जब आपको मधुमेह का पता चला है, तो आपके पास शायद बहुत सारे प्रश्न हैं इनमें से कई प्रश्नों का उत्तर आपके स्वास्थ्य सेवा प्रदाता द्वारा दिया जाना चाहिए और इस बीच, आपके पास अन्य बुनियादी प्रश्न हो सकते हैं कि मधुमेह क्या है, आपको यह कैसे हुआ,  और आपको आगे क्या करना चाहिए।

याद रखें कि आप अकेले नहीं हैं संयुक्त राज्य में 20 मिलियन से अधिक लोगों को मधुमेह है, और इस बीमारी के प्रभावों से निपटने में आपकी सहायता के लिए कई संसाधन उपलब्ध हैं मधुमेह कई कारणों से होता है। जब आपका शरीर पर्याप्त इंसुलिन का उत्पादन नहीं करता है, तो परिणाम कुछ उच्च रक्त शर्करा, उच्च रक्त ग्लूकोज, या हाइपरग्लेसेमिया के रूप में जाना जाता है, जो अनिवार्य रूप से मधुमेह या डायबिटीज है।

इंसुलिन एक बहुत ही महत्वपूर्ण हार्मोन है क्योंकि शरीर में सभी कोशिकाएं  रक्त प्रवाह से ग्लूकोज को अवशोषित करने के लिए इसकी आवश्यकता होती है कोशिकाओं को ऊर्जा के लिए इस ग्लूकोज की आवश्यकता होती है मधुमेह में, पर्याप्त इंसुलिन उपलब्ध नहीं होता है, इसलिए हम भोजन से अवशोषित ग्लूकोज को शरीर में कोशिकाओं में अवशोषित नहीं कर सकते हैं यह समय के साथ रक्त प्रवाह में बनता है, जिससे  आंखों, नसों, हृदय और गुर्दे जैसे महत्वपूर्ण अंगों में रक्त वाहिकाओं की दीवारों को नुकसान।

भारत सहित दुनिया भर में मधुमेह के निदान की दर बढ़ रही है। 1.3 बिलियन से अधिक लोगों के साथ भारत दुनिया की दूसरी सबसे बड़ी कुल आबादी वाला देश है। इंटरनेशनल डायबिटीज फेडरेशन का अनुमान है कि 2017 में भारत में 72.9 मिलियन वयस्क मधुमेह के साथ जी रहे थे। 2017 के एक अध्ययन में यह भी पाया गया कि शहरी क्षेत्रों में मधुमेह का प्रसार अधिक था।

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मेलिटस, या केवल मधुमेह, संयुक्त राज्य अमेरिका में लगभग 25.8 मिलियन लोगों को प्रभावित करने वाली एक पुरानी बीमारी है जो इसे मृत्यु का सातवां प्रमुख कारण बनाती है।  मधुमेह क्या है?  मधुमेह एक चयापचय विकार है जिसमें रक्त में शर्करा का उच्च स्तर होता है, जिसे हाइपरग्लेसेमिया कहा जाता है।  सामान्य परिस्थितियों में, भोजन ग्लूकोज में टूट जाता है जो फिर रक्तप्रवाह में प्रवेश करता है और शरीर के लिए ईंधन के रूप में कार्य करता है। 

अग्न्याशय इंसुलिन नामक एक हार्मोन का उत्पादन करता है जो रक्तप्रवाह से ग्लूकोज को तंत्रिका, वसा और यकृत में ले जाने में मदद करता है जहां इसे ईंधन के रूप में इस्तेमाल किया जा सकता है।  मधुमेह रोगी दो प्राथमिक कारणों से इस शर्करा को रक्तप्रवाह से बाहर निकालने में सक्षम नहीं होते हैं: 1) उनका अग्न्याशय पर्याप्त इंसुलिन का उत्पादन नहीं करता है और/या 2) उनकी कोशिकाएं इंसुलिन के लिए सामान्य रूप से प्रतिक्रिया नहीं करती हैं, एक स्थिति जिसे इंसुलिन प्रतिरोध कहा जाता है।  यही कारण है कि मधुमेह वाले लोगों में उच्च रक्त शर्करा का स्तर होता है।

डायबिटीज / मधुमेह के प्रकार

मधुमेह कई प्रकार का होता है । सामान्यतः इसे दो भागों में बांटा जाता है ।

1. प्राथमिक मधुमेह

प्राथमिक मधुमेह को दो वर्गों में बांटा गया है— 1. इंसुलिन पर निर्भर मधुमेह 2. इंसुलिन पर निर्भर न रहने वाला मधुमेह।

2. द्वितीयक मधुमेह

द्वितीयक मधुमेह दवाइयों के प्रभाव से , इंडोक्राइन में गड़बड़ी और इंसुलिन की गड़बड़ी से होता है। मधुमेह की संभावना इन रोगियों में अधिक रहती है । जैसे— मोटापा होना, पेंक्रियाज में गड़बड़ी, रीनल फ्लोयर, भूखा रहना , हार्टफेल, सिरोसिस ऑफ लिवर।

डायबिटीज इंटीपिडिस (Diabetes insipidus)

यह डायबिटीज रोग का दूसरा प्रकार है, जिसमें पेशाब की मात्रा बहुत बढ़ जाती है। पीयूष ग्रंथि के पश्चिमी खंड के स्राव में कमी होने पर यह रोग होता है। इस रोग में न तो मूत्र में शक्कर पाई जाती है और न रक्त में शक्कर की मात्रा बढ़ी हुई होती है। इसमें मूत्र का वर्ण ( रंग ) और सापेक्षिक घनत्व जल के समान ही हो जाता है। बार – बार अधिक मात्रा में पेशाब आना इसका मुख्य लक्षण है, अतः इसे ‘ बहुमूत्र ‘ रोग भी कहते हैं।

पेशाब स्वच्छ जल जैसा होता है , गंदला व दुर्गंध वाला नहीं होता , न उसमें एल्बुमिन पाया जाता है और और न ही शक्कर पाई जाती है । इस रोग के रोगी को भूख व प्यास बहुत लगती है , कब्ज रहता है या पतले दस्त होते हैं। शरीर दुबला व कमजोर हो जाता है, त्वचा रूखी – सूखी हो जाती है। नींद कम आती है, बेचैनी रहती है और मुंह बार – बार सूखता रहता है। आयुर्वेद में इसे ‘उदकमेह’ या ‘बहुमूत्र’ रोग कहते हैं।

इस रोग के होने का सर्वमान्य कारण पीयूष ग्रंथि की क्षति होता है, जो कि सिर में भारी आघात लगने, कोई ऑपरेशन होने या रेडियो थैरेपी ( सेक करना ) आदि किसी कारण से पहुंची हो सकती है। किसी ट्यूमर ( गांठ ) के होने से पहले वाले दबाव के कारण भी ऐसी क्षति पहुंच सकती है या एंसेफ्लाइट्स ( मस्तिष्क शोथ ) या मेनिनजाइटिस ( मस्तिष्क आवरण शोथ ) होने के बाद भी कभी – कभी ऐसा हो जाता है।

DIABETES CAUSES, SYMPTOMS & CURE डायबिटीज कारण और निवारण

डायबिटीज या शुगर की बीमारी का कारण

मधुमेह होने के अब तक निम्नलिखित कारणों का पता लगाया जा चुका है—

  • आनुवंशिक
  • निष्क्रियता या स्थूलता
  • चिकनाई वाला आहार
  • मानसिक तनाव
  • मोटापा
  • विषाणुओं का संक्रमण
  • शरीर में पैदा होने वाले कुछ हार्मोन्स लिंग या सेक्स
  • कुछ औषधियां
  • कुछ रोग
  • जाति, देश तथा परिवेश
  • धूम्रपान एवं शराब
  • गर्भावस्था का कुपोषण
  • उम्र
  • व्यवसाय
  • अन्य कारण

इन सब कारणों का संक्षिप्त विवरण नीचे दिया गया है।

आनुवंशिक

आनुवंशिकी डायबिटीज के जोखिम में जो भूमिका निभाती है वह अंततः डायबिटीज के प्रकार पर निर्भर करती है। यहां देखें कि आनुवंशिकी प्रत्येक बीमारी को कैसे प्रभावित कर सकती है।

मधुमेह, मां – बाप , दादा – दादी , नाना – नानी आदि से बच्चों में आ सकता है । यदि किसी बच्चे के माता – पिता दोनों मधुमेह का शिकार है तो किसी – न – किसी उम्र में उनके सभी बच्चों को मधुमेह हो सकता है । अधिकांश केसों में यह देखा गया है कि यदि माता – पिता दोनों में से एक मधुमेह के रोग से ग्रस्त है तो उनके 50 प्रतिशत बच्चे मधुमेह के रोगी होंगे।

कुछ आंकड़ों से यह भी देखा गया है कि जिनके माता – पिता , दादा – दादी तथा नाना – नानी में से दोनों मधुमेह से ग्रस्त हों तो उनके बच्चे कम – से – कम 50 प्रतिशत इस रोग से ग्रस्त होते हैं । यदि माता – पिता , दादा – दादी या नाना – नानी में से कोई एक मधुमेह रोग से ग्रस्त हो तो उनके बच्चों में मधुमेह होने की संभावना कम होती है । अतः भावी संतान के स्वास्थ्य के लिए यह अत्यंत आवश्यक है कि शादी से पहले यह ध्यान रखा जाए कि माता – पिता अथवा माता – पिता के खानदान दोनों मधुमेह के रोगी न हों।

जुड़वां बच्चों में से यदि किसी एक बच्चे को मधुमेह हो जाता है तो दूसरे बच्चे में मधुमेह होने की संभावना 70 प्रतिशत अधिक होती है । यह वास्तविकता है कि मधुमेह का रोग विरासत में मिलता है , लेकिन वंशानुगत रूप में यह बच्चों में किस प्रकार आता है , इस विषय में अभी तक विशेषज्ञों का ज्ञान न के बराबर है । इस विषय पर अनेक अनुसंधान किए जा रहे हैं । चित्र मधुमेह का आनुवंशिक रूप में होना दिखाया गया है ।

निष्क्रियता

अक्सर यह देखा गया है कि जो लोग आराम करते रहते हैं, उनमें मधुमेह होने की संभावना शारीरिक श्रम करने वालों की तुलना में बहुत अधिक होती है । शारीरिक श्रम , व्यायाम , योग , खेल आदि क्रिया – कलापों से व्यक्ति का शरीर ठीक से काम करता रहता है, इसीलिए मधुमेह की संभावना कम हो जाती है । जबकि निष्क्रियता के कारण व्यक्ति का वजन बढ़ने लगता है जिससे मधुमेह होने की संभावना बहुत अधिक बढ़ जाती है। परिश्रम करने से शरीर रक्त में उपस्थित अधिकांश शर्करा का उपयोग कर लेता है। परिणाम यह होता है कि पेंक्रियाज ग्रंथि का बोझ कम हो जाता है।

वसायुक्त आहार

आहार मनुष्य का सबसे बड़ा मित्र है और यही सबसे बड़ा शत्रु भी। चिकनाई वाला आहार तो हमारे शरीर का सबसे भयंकर शत्रु है। वसायुक्त आहार लेने से मोटापा बढ़ता है, क्योंकि वसा पेट, जांघों, नितंबों आदि में जमा होती रहती है। कुछ प्रयोगों में देखा गया है कि वसायुक्त आहार लेने से व्यक्ति जल्दी ही मधुमेह का रोगी हो जाता है।

प्रोफेसर जेम एंडरसन ने स्वस्थ युवकों को 60 प्रतिशत वसायुक्त भोजन दो सप्ताह तक दिया और उन्होंने देखा कि दो सप्ताह में ही वे युवक मधुमेह के रोगी हो गए। यह भी देखा गया है कि मधुमेह के रोगियों को वसारहित भोजन देने पर उनकी रक्त शर्करा में बहुत गिरावट आती है। वसारहित भोजन लेने से शरीर में जमी वसा प्रयोग में आने लगती है और ग्लूकोज का उपयोग बढ़ जाता है।

आज की दुनिया में हमारे खान – पान में चोकररहित आटा और चीनी का उपयोग ज्यों – ज्यों बढ़ा है, त्यों – त्यों मधुमेह के रोगियों की संख्या भी बढ़ी है। प्रोसेस्ड खाद्य पदार्थों का सेवन भी इस रोग के लिए काफी हद तक जिम्मेदार है। कुछ विशेषज्ञों ने यह निष्कर्ष निकाला है कि आहार में विटामिन ‘ बी -6 ‘ की कमी से भी मधुमेह रोग होता है, क्योंकि इसकी कमी से पेंक्रियाज के कार्य – कलापों पर बुरे प्रभाव पड़ते हैं।

भोजन में संतृप्त वसा, अत्यधिक मात्रा में प्रोटीन और अधिक कैलोरी वाले भोज्य पदार्थों के उपयोग से शरीर में यूरेनिक एसिड बढ़ता है, जिससे मधुमेह होने की संभावना बढ़ती है। यह भी देखा गया है कि अल्पतम वसायुक्त भोजन और उच्च रेशेदार भोजन तथा व्यायाम से मधुमेह का रोगी कुछ ही महीनों में सामान्य स्थिति प्राप्त कर लेता है, इसीलिए यह आवश्यक है कि हमें सदैव ही अत्यंत कम वसा वाला और चोकरयुक्त भोजन करना चाहिए।

तनाव

मानसिक तनाव किसी एक रोग का नहीं, बल्कि बहुत से रोगों का कारण बनता है। चिंता, क्रोध, द्वेष आदि की भावनाएं ऐसी हैं जिनसे स्नायुओं का दाब बढ़ता है और एड्रिनल ग्रंथि से अधिक हार्मोन पैदा होते हैं। इनके अलावा भी कई प्रकार के प्रभाव शरीर पर होते हैं। यह देखा गया है कि भावनात्मक विघ्नों से मधुमेह का जन्म होता है, क्योंकि इन बातों का अंतःस्रावी ग्रंथियों पर कुप्रभाव पड़ता है।

मानसिक तनाव के कारण सुस्ती, थकान, कमजोरी आदि पैदा होती हैं जिनसे मधुमेह रोग की संभावना बढ़ती है। इसलिए यह आवश्यक है कि मनुष्य को तनाव, चिंता और ईर्ष्यारहित जीवन बिताना चाहिए। मानसिक तनाव से ग्रस्त व्यक्ति प्रेम, सुख, शांति तथा सौहार्दपूर्ण व्यवहार से मानसिक क्रियाओं का तालमेल बेहतर रहता है और शरीर में ऐसे रसायन पैदा होते हैं, जो कार्बोहाइड्रेट की मेटाबॉलिक क्रियाओं को बढ़ाते हैं। इनसे मनुष्य में रोग प्रतिरोधात्मकता बढ़ती है और सौंदर्य में वृद्धि होती है।

मोटापा

मोटापा हमारा सबसे बड़ा दुश्मन है। इससे मधुमेह ही नहीं, बल्कि उच्च रक्तचाप, हृदय रोग आदि की संभावना भी बढ़ जाती है। यह देखा गया है कि मोटे आदमी की उम्र पतले आदमी की उम्र की तुलना में कम होती है। एक कहावत के अनुसार जितनी मोटी कमर, उतनी छोटी उमर। मोटापे का मुख्य कारण कैलोरी का वसा के रूप में जमा होना है।

अधिक चर्बी और कार्बोहाइड्रेट पचाने के लिए अधिक इंसुलिन की आवश्यकता होती है और अधिक इंसुलिन पैदा करने के लिए पेंक्रियाज की संवेदनशीलता बढ़ जाती है। परिणाम यह होता है कि पेंक्रियाज पर दाब बढ़ जाता है और धीरे – धीरे उसकी कार्य शक्ति कम हो जाती है। विभिन्न अध्ययनों से पता चला है कि मोटे लोगों में मधुमेह की संभावना बहुत अधिक होती है और पतले लोगों में बहुत कम।

जिस परिवार में कोई भी मधुमेह का रोगी नहीं होता, यदि उस परिवार में कोई व्यक्ति मोटा हो जाता है तो यह निश्चय है कि वह व्यक्ति मधुमेह रोग से ग्रस्त हो जाएगा। अध्ययनों से पता चला है कि जिन लोगों को मधुमेह का विकार होता है , उनमें से 80 प्रतिशत लोग मोटे होते हैं।

विषाणुओं का संक्रमण

विषाणुओं के संक्रमण से भी मधुमेह रोग होने की संभावना रहती है। यह देखा गया है कि राइनो वायरस भी मधुमेह रोग का कारण हो सकता है।

विषाणु पेंक्रियाज ग्रंथि में अव्यवस्थित बीटा कोषों को नष्ट कर देते हैं। विषाणुओं से लड़ने के लिए शरीर में पैदा हुई एंटीबॉडीज भी पेंक्रियाज पर आक्रमण करके बीटा कोषों पर दुष्प्रभाव डालती है, फलतः इंसुलिन बनना बंद हो जाता है और व्यक्ति मधुमेह का रोगी हो जाता है।

विषाणुओं से यकृत भी प्रभावित होकर वायरल हिप्थेटाइटस रोग के कारण व्यक्ति को मधुमेह का रोगी बना देता है। मधुमेह कोई संक्रामक रोग नहीं है, लेकिन इसके वायरस द्वारा होने वाले कुछ प्रभाव इंसुलिन पैदा करने वाली कोशिकाओं को नष्ट कर देते हैं और व्यक्ति को मधुमेह का रोगी बना देते हैं।

शरीर में पैदा होने वाले कुछ हार्मोन

शरीर में पैदा होने वाले कुछ ऐसे हार्मोन हैं, जो इंसुलिन बनने की प्रक्रिया पर प्रभाव डालते हैं। पिट्यूटरी, थाइराइड, एड्रिनल आदि ग्रंथियों में यदि कोई विकार पैदा हो जाता है तो इनसे पैदा होने वाले हार्मोन पैंक्रियाज पर प्रभाव डालते हैं, जिससे मधुमेह रोग की संभावना बढ़ जाती है। पेंक्रियाटाइटस तथा पेंक्रियाटिक कारसिनोमा आदि रोगों में रक्त व मूत्र में चीनी की मात्रा बढ़ जाती है। इसी को हम मधुमेह कहते हैं।

औषधियां

कुछ औषधियों का भी पेंक्रियाज ग्रंथि पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है। स्टेराइड औषधियां, मूत्रवर्द्धक औषधियां, उच्च रक्तचाप की औषधियां, कार्टिजोन औषधियां, त्वचा संबंधी रोगों की औषधियां और गर्भनिरोधक औषधियां, इनका लंबे समय तक प्रयोग करने से मधुमेह होने की संभावना बढ़ जाती है। हृदय रोगों में प्रयोग होने वाली कुछ औषधियां भी मधुमेह रोग को जन्म देती हैं।

डायबिटीज या शुगर की बीमारी का लक्षण

DIABETES CAUSES, SYMPTOMS & CURE डायबिटीज कारण और निवारण

मधुमेह के लक्षण

बार – बार पेशाब आना

डायबिटीज के रोगियों को बार – बार पेशाब आने की शिकायत रहती है और पेशाब द्वारा शरीर का अतिरिक्त ग्लूकोज शरीर से बाहर निकलता रहता है। अधिक पानी एवं शर्करा के निकलने से रोगी को प्यास अधिक लगती है। शरीर से पानी तथा चीनी अधिक निकलने से व्यक्ति कमजोर हो जाता है। उसके चेहरे की कांति भी समाप्त होने लगती है। स्वस्थ व्यक्ति को रात्रि में एक बार भी पेशाब नहीं आता है, लेकिन जैसे ही मधुमेह का विकार पैदा होता है, उस व्यक्ति को रात्रि में कम – से – कम दो बार पेशाब के लिए अवश्य जाना पड़ता है।

बहुत प्यास लगना

मधुमेह का विकार पैदा होने पर रोगी को अधिक प्यास लगने लगती है, क्योंकि उसे अधिक पेशाब आने की शिकायत हो जाती है। उसका मुंह सूखने लगता है। रात्रि को सोते समय भी मुंह सूख जाता है। बार – बार पानी पीने की इच्छा होना भी इस रोग का लक्षण है।

अधिक भूख लगना

मधुमेह के रोगियों को भूख अधिक लगती है, लेकिन अधिक खाने पर भी उन्हें कमजोरी की शिकायत रहती है, क्योंकि इंसुलिन की कमी के कारण ग्लूकोज कोशिकाओं के अंदर नहीं जा पाता, इसलिए कोशिकाएं भूखी ही रहती हैं।

मुंह सूखना

यह भी देखा गया है कि मधुमेह का रोग होते ही जीभ और तालू सूखने लगते हैं। जीभ धीरे – धीरे सख्त और खुरदरी होने लगती है। जीभ का और गले का सूखना इस बात का द्योतक है कि व्यक्ति मधुमेह का शिकार हो गया है। इस लक्षण में रोगी को डायबिटीज का परीक्षण कराना अति आवश्यक है।

वजन कम होना

डायबिटीजके रोगी का वजन कम होने लगता है। इसका कारण यह है कि कोशिकाओं को ग्लूकोज का पोषण नहीं मिलता। इसके साथ – ही – साथ उसे पेशाब बहुत आता है जिससे शारीरिक कमजोरी बढ़ती रहती है। शरीर में वसा के विघटित होने से इसकी मात्रा कम होती जाती है और रोगी कमजोर होने लगता है।

कमजोरी आना और थकावट होना

मधुमेह के रोगी द्वारा भोजन में ली गई शुगर कोशिकाओं को नहीं मिल पाती। इसके कारण मस्तिष्क, स्नायु संस्थान और मांसपेशियों को ऊर्जा कम मिलती है, इसीलिए ये जल्दी थक जाती हैं और शरीर में कमजोरी महसूस होने लगती है, अतः मधुमेह के रोगी को थकावट का अहसास अधिक होता है।

घावों का जल्दी ठीक न होना

यदि डायबिटीज के रोगी को कहीं चोट लग जाए या कट जाए तो जल्दी घाव बन जाता है, जो काफी लम्बे अरसे में ठीक होता है। अधिक ग्लूकोजयुक्त रक्त पर जीवाणु तेजी से संक्रमण करते हैं, इसीलिए मधुमेह के रोगियों के शरीर में हुए घाव जल्दी से ठीक नहीं हो पाते।

गुप्तांगों के आसपास खुजली होना

डायबिटीज से ग्रस्त महिला रोगियों को योनि के आसपास खुजली की काफी शिकायत रहती है। इसी के आधार पर मधुमेह होने का संदेह होने लगता है। रक्त में ग्लूकोज अधिक होने के कारण तंत्रिकाओं के सिरों में खुजली का आभास होता है। यही कारण है कि मधुमेह के रोगियों के गुप्तांगों के चारों ओर खुजली होने लगती है।

त्वचा और मसूड़ों में विकार होना

रक्त में अधिक ग्लूकोज के कारण त्वचा और मसूड़ों में विकार पैदा होना एक आम स्थिति है, क्योंकि जीवाणुओं का हमला ऐसी स्थिति में सरलता से हो जाता है। यही कारण है कि मधुमेह के रोगी को मसूड़ों और त्वचा के विकार होते रहते हैं। मधुमेह रोग में सर्दी, खांसी और तपेदिक जैसे रोग आसानी से हो जाते हैं।

नजर कमजोर होना

डायबिटीजके रोगियों में चश्मे का नम्बर बार – बार बढ़ता रहता है। इस रोग में रक्तवाहिनियां चौड़ी हो जाती हैं। आंख के लैंस में धुंधलापन आ जाता है। इसीलिए मोतियाबिंद होने का अंदेशा अधिक रहता है।

हाथ – पैरों का सुन्न होना

मधुमेह के रोगियों के हाथ – पैर प्रायः सुन्न हो जाते हैं। शरीर में झुनझुनी – सी होने लगती है और हाथ – पैर दुखने लगते हैं।

यौन दुर्बलता या नपुंसकता

डायबिटीज रोग में स्नायुओं में स्थित प्रोटीन का विघटन हो जाता है, अतः रोगी में दुर्बलता आ जाती है। यही नहीं, मधुमेह के रोगी में नपुंसकता के लक्षण भी आ जाते हैं। उसकी संभोग की इच्छा भी कम हो जाती है।

पेशाब पर चींटी लगना

पेशाब पर चींटी लगना– सामान्यतयाः यह देखा गया है कि मधुमेह रोग से ग्रस्त लोगों के पेशाब में शर्करा आने लगती है। वे लोग जहां पर भी पेशाब करते हैं उस स्थान पर पेशाब सूखने पर चीटियां लग जाती हैं। यह मधुमेह होने का सबसे बड़ा लक्षण है।

गैंगरिन होना

मधुमेह के कुछ रोगियों को गैंगरिन का फोड़ा हो जाता है। इसका ठीक होना असंभव होता है और इसमें रोगी को पैर कटवाना पड़ता है। कुछ लोगों की एड़ियों में खरोंच लगने पर ऐसा घाव हो जाता है, जो अंदर ही अंदर पैर को खोखला करता रहता है। ऐसा घाव भरता ही नहीं और पैर कटवाने की नौबत आ जाती है।

बेहोशी आना

मधुमेह रोग में कोशिकाओं के पोषण की पूर्ति न होने और वसा का विघटन होने के कारण रक्त में किटोन बॉडीज बहुत अधिक हो जाती हैं। किटोन बॉडीज के बहुत अधिक होने से रक्त की अम्लता बढ़ जाती है जिससे रोगी बेहोश हो जाता है। यह ऐसा लक्षण है, जो किसी भी व्यक्ति को मधुमेह होने का संकेत करता है।

यह एक ऊपर बताए गए लक्षणों से यह ज्ञात होता है कि व्यक्ति मधुमेह का रोगी हो सकता है, लेकिन मधुमेह रोग का पता लगाने के लिए रक्त का परीक्षण कराना अत्यंत आवश्यक है।

मधुमेह रोग के निदान के तरीके आगे दिए गए ऐसा रोग है जिसका पता लम्बे समय तक नहीं लग पाता। बूढ़े लोगों में लक्षणों के आधार पर इस रोग का पता लगने में वर्षों लग जाते हैं, इसीलिए यह आवश्यक है कि 40 वर्ष की उम्र के बाद हर छः महीने में रक्त परीक्षण करा लेना चाहिए।

इनके साथ – साथ डायबिटीज के अन्य लक्षण

  • शरीर में थकान व कमजोरी महसूस होना
  • वजन कम हो जाना।
  • मानसिक थकान रहना व एकाग्रता का अभाव
  • घावों का देर से भरना
  • घावों में बार – बार पूय का बनना
  • हाथ – पैरों में झनझनाहट और दर्द का रहना व सुन्न होना।
  • गुप्तांगों के आसपास खुजली होना
  • कपड़ों पर सफेद धब्बे पड़ना
  • नजर का कमजोर होना व देखने में धुंधलापन आना
  • यौन दुर्बलता या नपुंसकता आना
  • रोगों का बार – बार आक्रमण होना
  • कम उम्र में धमनियों के रोगों का होना
  • .मधुमेह की बेहोशी होना।
  • किसी काम में मन न लगना
  • टांगों में पीड़ा और दुर्बलता
  • पुरुष की मूनेंद्रिय एवं स्त्रियों की योनि में अचानक सूजन होना
  • पूछताछ करने पर परिवार में किसी के मधुमेह रोग का पता चलना
  • पैरों के तलुवों में हमेशा भड़कन व जलन का रहना
  • शरीर की त्वचा पर सूखापन रहना
  • बार – बार फोड़े – फुंसी का निकलना
  • मूत्र पर चींटियों का एकत्र होना।
  • रोगी को बार – बार कुछ खाने की इच्छा होना
  • सोने की या आराम करने की प्रबल इच्छा व अधिक परिश्रम से जी चुराना
  • स्त्रियों में गर्भ का सामान्य से अधिक बड़ा होना जिससे प्रसव के समय मुश्किल होती है। बहुत बार बच्चे की मृत्यु भी हो जाती है।
  • सर्दियों में भी ज्यादा प्यास लगना ।
  • बहुत बार किसी रोग की जांच के दौरान मधुमेह रोग का पता लगता है। इसलिए मधुमेह के रोगी की शारीरिक जांच अच्छी प्रकार करनी चाहिए।

The genetic trial is only going to disclose an association or a chance that someone might get type 1 or type 2 diabetes, because the disease is not only caused by genetic difference.

Mónica Alvarado

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